देहरादून। लोकसभा चुनाव के पहले चरण में ही उत्तराखंड में मतदान होना है. राज्य की पांच लोकसभा सीटों के लिए एक ही चरण में मतदान होना है। 11 अप्रैल को राज्य में मतदान होना है। राज्य में चुनावों के नामांकन एक हफ्तेबाद शुरू होना है। चुनावों के लिए एक महीने का ही समय मिलने के वजह से राजनीतिक दल भी दबाव में आ गए हैं। अभी तक किसी भी दल ने अपने प्रत्याक्षियों के नाम तय नहीं किए हैं। खास तौर पर प्रदेश के दो बड़े दल भाजपा और कांग्रेस में अब भी प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया जारी है।
राज्य में एक मामले में सभी दल एक जैसी स्थिति में हैं। भाजपा, कांग्रेस, राज्य की एकमात्र क्षेत्रीय पार्टी यूकेडी और हाल ही में गठबंधन में बंधे बसपा-सपा किसी ने भी अभी तक लोकसभा चुनावों के लिए प्रत्याशियों का ऐलान नहीं किया है और लगातार दावेदार सामने आ रहे हैं।
18 तारीख से नामांकन शुरु होने हैं लेकिन प्रत्याक्षियों को लेकर अभी मंथन का दौर ही जारी है। यूकेडी ने कुछ सीटों पर अपने प्रत्याशी तैयार कर लिए हैं लेकिन औपचारिक ऐलान किसी पर नहीं किया गया है। भाजपा के लिए प्रत्याशियों का चयन थोडा आसान हो सकता है क्योंकि पांचों सीटों पर उसके सांसद हैं और इन्हें रिपीट करना आसान विकल्प है। हालांकि पार्टी के प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू कहते हैं कि अभी कुछ साफ नहीं है और फैसला पार्लियामेंट्री बोर्ड करेगा।
यूपी में कांग्रेस ने कुछ प्रत्याक्षियों का ऐलान तो कर दिया है लेकिन उत्तराखण्ड में अभी टिकट के लिए बैठकों का दौर जारी है। दिल्ली में सेंट्रल इलेक्शन कमेटी और सेंट्रल वर्किंग कमेटी की बैठकें जारी हैं और चुनाव लड़ने के इच्छुक अपने नाम पर मोहर लगने की दुआएं मांग रहे हैं। सपा-बसपा ने गठबंधन के बाद सीटों का बंटवारा तो कर लिया है लेकिन प्रत्याशियों का ऐलान नहीं किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दोनों पार्टियां अब भी यूपी की ओर देख रही हैं और अगर वहां  कांग्रेस के साथ गठबंधन की कोई गुंजाइश बनती है तो फिर यहां भी पुनर्विचार किया जा सकता है।

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