देहरादून। पुलिस की लाख कोशिशों और दावों के बीच दून की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के सभी दावे अभीतक खोखले साबित हो रहे है। जबकि इसके लिए दून में अलग से ट्रैफिक निदेशालय का गठन भी किया गया। किन्तु पुलिस की यह व्यवस्था भी पूरी तरह से विफल साबित हुई। जिसके बाद जब सारी निगाहे शहर मंे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर आ टिकी है। क्योंकि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत चैराहों और सड़कों के चैड़ीकरण पर काम होना है।
 प्रदेश की राजधानी देहरादून की सड़कों पर 10 लाख से ज्यादा गाड़ियां दौड़ती हैं। 8 लाख से ज्यादा वाहन देहरादून आरटीओ में रजिस्टर्ड हैं और हर दिन गाड़ियों की संख्या में बढ़ोत्तरी ही हो रही है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या और गाड़ियों की संख्या के मुताबिक दून की सड़कों का चैड़ीकरण नहीं हो सका है। यही वजह भी है कि ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए सालों से हो रहे पुलिस के प्रयास हर कदम पर फेल हो जा रहे हैं। बिगड़ती यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अलग से ट्रैफिक निदेशालय का भी गठन किया गया। बावजूद इसके दून वासियों को जाम से निजात नहीं मिल सकी है।
वहीं अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के जरिए शहर की ट्रैफिक व्यवस्थाएं सुधारने की बात की जा रही है। मगर स्मार्ट सिटी के तहत काम कब शुरू होगा इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। यानी ट्रैफिक की वर्तमान में जो समस्याएं हैं वो स्मार्ट सिटी बनने तक ऐसी ही रहेंगी। दरअसल शहर के अलग अलग चैराहों पर जाम लगने के कारणों का पता चलने पर जब ट्रैफिक पुलिस ने संबंधित विभागों को पत्र भेजे तो जवाब में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कार्य किए जाने की बात कही गई है। बता दें कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की अभी नींव तक नहीं रखी जा सकी है। ऐसे में कहना पड़ेगा कि दून वासियों को जाम से फिलहाल राहत नहीं मिलने वाली है। इस मामले में ट्रैफिक एसपी प्रकाश चंद्र ने कहा कि इस विषय को लेकर कई बार पत्राचार किया जा चुका है। जवाब में संबंधित विभाग द्वारा अवगत कराया गया है कि स्मार्ट सिटी के अंतर्गत यह सारी योजनाएं बनाई गई हैं। इन योजनाओं पर शीघ्र ही काम होने वाला है। स्मार्ट सिटी के तहत रोड चैड़ीकरण, चैराहों का चैड़ीकरण और स्मार्ट सिग्नल वगैरह लगाए जाने हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्मार्ट सिटी के तहत यह सारे काम होंगे तब निरूसंदेह इसका फायदा होगा।

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