पहाड़ी ज़िलों में शराब की खपत उम्मीद से ज्यादा

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उत्तराखंड के पहाड़ी ज़िलों में शराब के विरोध के बीच आबकारी विभाग की सारी उम्मीदें पहाड़ से ही टिकीं हैं. आंकड़े बताते है कि प्रदेश के पांच पहाड़ी ज़िलों में शराब की खपत उम्मीद से ज्यादा है, जबकि मैदानी ज़िलों में विदेशी शराब के दिवाने थोड़े कम हैं.

इस वित्त वर्ष के ख़त्म होने में तीन महीने बचे हैं और आबकारी विभाग अपने रेवेन्यू टारगेट 2650 करोड़ का करीब 70 प्रतिशत ही तय कर पाया है. सरकार के लिए शराब, कमाई का बड़ा जरिया है. लिहाज़ा तमाम विरोध के बीच भी सारा फोकस शराब पर रहता है. आंकड़े बताते हैं कि पांच ज़िले – टिहरी, चम्पावत, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा शामिल – शराब पीने के मामले में अव्वल हैं. अल्मोड़ा में नवंबर तक, पिछले साल के मुकाबले 58 फीसदी ज्यादा शराब गटक ली गई. वहीं अन्य चार ज़िलों में अंग्रेजी शराब के शौकीनों की तादाद 28 से 38 फीसदी के बीच बढ़ी है. उत्साहित आबकारी मंत्री प्रकाश पंतका कहना है कि उनका विभाग बचा हुआ टारगेट मार्च तक पूरा कर लेगा.

मैदानी ज़िलों में ऊधमसिंह नगर ज़िले में पिछले साल के मुकाबले 2 फीसदी ही अंग्रेजी शराब की खपत बढ़ी है, जबकि देहरादून में ये 17 फीसदी के आसपास है. दरअसल उत्तराखंड में शराब का विरोध हमेशा स्पॉटलाइट में रहा है. अप्रैल में जब सरकार नई आबकारी पॉलिसी को लेकर आई तो विरोध इस कदर बढ़ गया कि कई जगह दुकानें नहीं खुल पाईं. लेकिन पैसा कमाने को बेताब विभाग ने कुछ गाड़ियों को चलती फिरती दुकान में तब्दील कर लिया जो पहाड़ में अभी भी दिख जाती हैं.

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