नशामुक्ति केन्द्रों (टार्चर सेन्टरों) पर सरकार क्यों है खामोश !

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नशामुक्ति केन्द्रों (टार्चर सेन्टरों) पर सरकार क्यों है खामोश !

प्रदेश में सैकड़ों अवैध नशामुक्ति केन्द्र हैं संचालित।

किसने दिया इनको युवाओं की जान से खेलने का लाईसेंस।

शासन/प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे टार्चर सेंटर।

भारत सरकार की गाईड लाईन के तहत जारी हों लाईसेंस।

विकासनगर- मोर्चा कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए जी00एम0वी0एन0 के पूर्व उपाध्यक्ष एवं जनसंघर्ष मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश भर में अवैध रूप से संचालित नशामुक्ति केन्द्रों/आश्रमों ने टार्चर केन्द्रों का रूपधारण कर लिया है, जिसके तहत मुख्य लाईन से भटक चुके युवाओं/नशेड़ियों को इन केन्द्रों में रखा जाता है तथा एक सजायाफ्ता कैदी से भी बद्त्तर सलूक इन केन्द्रों में किया जाता है। इनके अभिभावकों से मोटी रकम लेकर इनको सुधारने के नाम पर डराया-धमकाया व मानसिक उत्पीड़न तक किया जाता है।

नेगी ने कहा कि मोर्चा द्वारा लगभग दो वर्ष पूर्व इस सम्बन्ध में स्वास्थ्य विभाग उत्तराखण्ड शासन व निदेशालय से सूचना चाही गयी तथा अवगत कराया था कि प्रदेश में सैकड़ों अवैध केन्द्र संचालित हैं तथा इनको किसने लाईसेंस जारी किये तथा इनको किसकी सरपरस्ती में संचालित किया जा रहा है। इस मामले में विभाग द्वारा पल्ला झाड लिया गयां कि ये समाज कल्याण/मद्यनिषेद विभाग का काम है, लेकिन इस विभाग ने उस वक्त अपनी जिम्मेदारी से मुॅंह मोड लिया।

उक्त मामले को मोर्चा के जिला मीडिया प्रभारी प्रवीण शर्मा पीन्नी ने मा0 सूचना आयोग के समक्ष भी रखा था, लेकिन सूचना आयोग ने उस वक्त मामले में गम्भीरता नहीं दिखायी, अगर आयोग उस वक्त गम्भीरता दिखाता तो ये अवैध टार्चर केन्द्र सब तक बन्द हो चुके होते और न ही इन टार्चर केन्द्रों से पीड़ित युवाओं को भागने पर मजबूर होना पड़ता।
नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार को इन केन्द्रों पर सख्ती से पेश आना चाहिए तथा सामाजिक न्याय एवं महिला सशक्तिकरण विभाग, भारत सरकार से आग्रह कर अच्छी संस्थाओं के माध्यम से विधिवत लाईसेंस जारी कर केन्द्र खोलने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। प्रदेश हित में युवाओं को सही लाईन पर लाने के लिए राज्य सरकार भी अपने स्तर प्रयास से केन्द्रों की स्थापना कर सकती है।

पत्रकार वार्ता में:-दिलबाग सिंह, श्रवण ओझा, बिरेन्द्र सिंह आदि थे।

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