सालों बाद भी नहीं मिली शहीद के परिजनों को भूमि

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देहरादून। देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए वीर जवान शहीद राइफलमैन विकास सिंह के परिजनों को 18 साल बाद भी भूमि नहीं मिल पाई है। 15 गढ़वाल राइफल्स के वीर जवान राइफलमैन विकास 11 जुलाई 2001 को कश्मीर के राजौरी में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। जिसके बाद सरकार ने शहीद के परिजनों को एक एकड़ भूमि देने की घोषणा की थी। लेकिन 18 सालों बाद न परिजनों को भूमि मिली और न ही छोटे भाई को कोई नौकरी।
देश की सुरक्षा में जान न्यौछावर करने वाले शहीद विकास का परिवार शहर से छह किलोमीटर चंद्रोटी गांव में रहता है। सालों बाद भी परिजनों को भूमि का इंतजार है। शहीद विकास के पिता मोहन सिंह चैधरी ने बताया कि विकास देश की रक्षा करते हुए 11 जुलाई 2001 में शहीद हो गए थे। जिसके बाद सरकार ने एक एकड़ भूमि देने की घोषणा की थी। लेकिन सालों बाद भी सरकार की ओर से भूमि नहीं दी गई। इतना ही नहीं बड़े बेटे के शहीद होने के बाद छोटे बेटे को नौकरी भी नहीं मिल पाई है। उन्होंने बताया कि विकास का बचपन से ही सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करने का सपना था। लेकिन देश के लिए शहीद हुए विकास के परिजनों के लिए सरकार ने जो घोषणा की थी, सालों बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। शहीद विकास सिंह सेना मेडल विजेता था।

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