पहाड़ के भले की एक जरूरी बात ..

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पहाड़ के भले की एक जरूरी बात ..

योगेश भट्ट

वक्त बहुत गुजर चुका है, काफी देर भी हो चुकी है । काफी कुछ लुट चुका है, बचाने के लिए भी बहुत कुछ शेष भी नहीं है । मगर जज्बात हों और मजबूत इरादे हों तो नए सिरे से इबारत लिखी जा सकती है । जो लुट चुका है उसे वापस भी लिया जा सकता है और जो बचा है उसे सहेजा भी सकता है। जी हां, बात पहाड़ की जमीनों को बचाने की हो रही है । इस बार इस शुरुआत का जिम्मा गरीब क्राति अभियान ने उठाया है। वही गरीब क्रांति अभियान जो पहाड़ में चकबंदी को लेकर अलख जगाए हुए है । जिसकी कोशिश और संघर्ष के परिणाम स्वरूप प्रदेश में जोत चकबन्दी एवं भूमि व्यवस्था विधेयक, 2016’’ अधिनियम वजूद में आया है ।

सब कुछ ठीक रहा तो जल्द इसकी नियमावली भी तैयार हो जाएगी, चर्चा है कि मुख्यमंत्री और प्रदेश के कृषि मंत्री के गांवों से चकबंदी की शुरूआत होने जा रही है। इस मुहिम को आगे बढ़ाने के मकसद से गरीब क्राति अभियान 01 मार्च 2019 को ‘‘चकबन्दी दिवस’’ के मौके पर ‘‘बात पहाड़ की जमीन बचाने की’’ का आयोजन कर रहा है । नगर निगम सभागर देहरादून में आयोजित होने जा रहे इस कार्यक्रम में पहाड़ की जमीन को बचाने की बात होगी,इसके लिए जरूरी भू कानून के मसौदे पर चर्चा भी होगी। इसके साथ ही चकबंदी आंदोलन के प्रमुख स्तंभ व वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय एल़ मोहन कोठियाल को याद किया जाएगा । अभियान ने उनकी स्मृति में ‘‘संकल्प श्री’’ सम्मान शुरू किया है, जो प्रत्येक वर्ष कृषि बागवानी व भूमि सुधार के क्षेत्र में कार्य करने वाले मनीषियों को दिया जाएगा।

चलिए, देर से ही सही पहाड़ में कम से कम जमीनों को बचाने की बात शुरू तो हुई । अभी तक बात अलग अलग मंचों से उठती जरूर रही है, लेकिन उम्मीद है कि इस आयोजन से पहाड़ की जमीनों को बचाने के लिए उठ रहे सुरों को नयी ऊर्जा मिलेगी । अभियान के संयोजक कपिल डोभाल व उनके सभी सहयोगियों को इस आशा के साथ शुभकामनाएं कि उनका यह प्रयास पहाड़ की जमीनों को बचाने की दिशा में एक सार्थक पहल साबित होगा ।

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