भाजपा-कांग्रेस को भीतरघात का भय

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देहरादून। लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों को अपने ही कुछ लोगों से खतरा बना हुआ है। हालांकि इसके लिए भाजपा और कांग्रेस ही जिम्मेदार भी हैं। दरअसल यह बात राजनीतिक दलों की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले उन कार्यकर्ताओ कीघ् है, जो पार्टी के लिए बूथ स्तर पर सालों से मजबूती के साथ काम करते आ रहे हैं., लेकिन 2018 के निकाय चुनावों में पार्टी से टिकट न मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं ने पार्टी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है। इसमें कुछ खुले आम तो कुछ पार्टी के खिलाफ अंदर खाने नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इसका खामियाजा पार्टियों को लोकसभा चुनाव में उठाना पड़ सकता है। जिसके चलते सूबे की पांचों सीटों पर कांग्रेस और भाजपा को भीतरघात का भय सताने लगा है।
पूर्व भाजपा कार्यकर्ता अनुराग गुप्ता का कहना है कि बाहर के लोगों को बीजेपी में लाया गया और पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया। इसका खामियाजा बीजेपी को उठाना पड़ेगा. वहीं लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सभी राजनीतिक दलों ने पूरा दम खम झोंक दिया है। लेकिन निकाय चुनाव में अपनी पार्टी से नाराज हूए कई कार्यकर्ता अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसका अंदेशा भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी के पदाधिकारियों को भी है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि जब भी चुनाव होता है तब कई लोग चाहते हैं कि उन्हें चुनाव लड़ने दिया जाए। मगर आखिर में टिकट तो एक ही व्यक्ति को दिया जा सकता है। ऐसे समय में बहुत सारे लोग पार्टी के निर्णय को स्वीकार करते हैं और बहुत सारे लोग पार्टी के निर्णय को स्वीकार नहीं करते हैं। वो बगावत करते हैं और चुनाव लड़ते हैं. इसीको लोकतंत्र कहते हैं. लेकिन उन्होंने कहा कि इसका लोकसभा के चुनाव पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
वहीं भाजपा के मीडिया प्रभारी देवेंद्र भसीन का कहना है कि मतभेद तो परिवार में भी होता है। मगर जब बड़ा मामला होता है तब परिवार के सभी लोग एकजुट हो जाते हैं. ऐसे समय में छोटे मुद्दे गौण पड़ जाते हैं।
भले ही पार्टी के जिम्मेदार नेता मीडिया के सामने खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हों, लेकिन पार्टी से नाराज कार्यकर्ताओ की मनसा से वे वाकिफ हैं। उन्हें इसका लोकसभा चुनाव में होने वाले नुकसान का आभास भी है। अगर समय रहते नाराज कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर नहीं की गई तो इसका खामियाजा दोनों ही राजनीतिक दलों को लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

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