कहीं बसपा हरिद्वार और नैनीताल में न बिगाड़ दे कांग्रेस के समीकरण

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देहरादून। अगर बात उत्तराखंड की करें तो यहां भी बहुजन समाज पार्टी के तेवर तल्ख दिख रहे हैं। हरिद्वार और नैनीताल लोकसभा सीट पर बीएसपी पूरी तैयारियां कर रही है। बीएसपी की तैयारी कांग्रेस के लिए दिक्कतें पैदा कर सकती है। बता दें कि अबतक उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों पर ज्यादातर कांग्रेस और भाजपा का राज रहा है। लेकिन सपा और बसपा के गठबंधन के कारण दोनों सियासी दलों कांग्रेस और भाजपा का गणित बिगड़ सकता है।
2014 के लोकसभा चुनावों में हरिद्वार सीट से एक लाख 20 हजार वोट और नैनीताल सीट से करीब 60 हजार वोट इन पार्टियों को मिले थे. इस गणित का बड़ा असर हरिद्वार सीट में देखने को मिला था। आलम ये था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की पत्नी रेनू रावत को हार का मुंह देखना पड़ा था। अब सपा-बसपा का गठबंधन हो गया है तो इनके नेता मानते हैं कि उनका वोट बैंक बड़ा है और राज्य की पांचों सीटों पर शिकंजा कसने को तैयार हैं।
नैनीताल और हरिद्वार सीट पर दलित वोट बैंक पर हमेशा कांग्रेस-सपा-बसपा अपना हक जमाती रही है। लेकिन इस चुनाव में गठबंधन पर कटाक्ष करते हुए कांग्रेस मानती है कि अब गठबंधन का उत्तराखंड में कोई असर नहीं पड़ेगा, जो वोट उनके पास था आज वो कांग्रेस के साथ है। कांग्रेस के प्रवक्ता आरपी रतूड़ी ने कहा कि बीएसपी और सपा को वोट देनेवाले मतदाताओं ने तय किया है कि वे अपने वोट को खराब नहीं होने देंगे। इन मतदाताओं की नजर कांग्रेस की तरफ है. उन्होंने कहा कि इन मतदाताओं को मालूम है कि सांप्रदायिक पार्टी बीजेपी को कांग्रेस ही हरा सकती है।
वहीं बीएसपी के प्रदेश महासचिव चरण सिंह का कहना है कि बीएसपी राष्ट्रीय पार्टी बनकर सामने आई है और सभी को परास्त कर देगी. उन्होंने कहा कि इस बार बीएसपी बड़ी तैयारी के साथ चुनाव लड़ने जा रही है. उन्होंने बीएसपी-सपा गठबंधन के बल पर हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर सहित उत्तराखंड में पांचों लोकसभा सीट जीतने का दावा किया।
चुनाव में हर एक वोट महत्वपूर्ण माना जाता है. कुछ दिन पहले यूपी में कांग्रेस और बीएसपी मुखिया में छिड़ी बयानबाजी की जंग का उत्तराखंड में भी असर देखने को मिल सकता है. यदि बीएसपी एक बार फिर अपने वोटरों को लुभाने में कामयाब हुई तो कांग्रेस के समीकरण तो बिगड़ ही सकते हैं।

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