देवप्रयाग में शराब प्लाट लगाने के मामले में अकेली पड़ी त्रिवेन्द्र सरकार

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देहरादून। जनपद टिहरी के देवप्रयाग में शराब फैक्ट्री खोलने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है और इस मामले में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार अकेली पड़ती नजर आ रही है। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे गंगा नदी का अपमान बताया। शंकराचार्य ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में और विशेषकर देवप्रयाग जहां भागीरथी और अलकनंदा मिलकर गंगा बनाती हैं। वहां शराब का उत्पादन देवभूमि की महत्ता को कम करेगा। इसका प्रभाव राज्य की संस्कृति पर पड़ेगा, पूरे देश पर पड़ेगा.
उत्तराखंड की महिलाएं शराब का मुखर होकर विरोध करती रही हैं। इस बार भी उत्तराखंड महिला मंच ने भी गंगा के तट पर शराब की फैक्टरी लगाने का कड़ा विरोध किया है। मंच की अध्यक्ष निर्मला बिष्ट ने रोजगार देने के नाम पर देवप्रयाग में शराब की फैक्ट्री लगाने को उत्तराखंड की भावना के साथ धोखा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा करके उत्तराखंड में नए आंदोलन को जन्म देने का काम कर रही है। इस बीच रविवार को देहरादून पहुंचे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने भी कहा कि उन्हें यह मामला अटपटा लग रहा है। हालांकि इस मामले में कुछ साफ कहने से इनकार करते हुए भट्ट ने कहा कि उन्हें इस मामले में ज्यादा जानकारी नहीं है. साथ ही यह भी कहा कि सीएम प्रदेश से बाहर हैं, उनके वापस आने पर इस मुद्दे पर बात करेंगे।
विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक प्रवीण तोगडिया के कड़े विरोध के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने भी हल्ला बोल दिया है.। खंडूड़ी ने तो यहां तक कह दिया कि शराब को पैसा कमाने का साधन बनाने उत्तराखंड के लिए आत्महत्या करने जैसा है।
पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने कहा कि वह देवभूमि में शराब के कारोबार से बिल्कुल सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप पूरे तरीके से शराब पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते तो कम से प्रावधान कड़े जरूर कीजिए ताकि आम आदमी शराब की वजह से बरबाद न हो। खंडूड़ी ने कहा कि उन्होंने अपने समय में कड़े प्रावधान लागू किए थे।
पूर्व सीएम ने कहा कि किसी भी सरकार को कोई अधिकार नहीं है कि वह देवभूमि की गरिमा के खिलाफ काम करे, चाहे वह बीजेपी की सरकार हो या कांग्रेस की। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में शराब को पैसा कमाने का साधन बनाना बहुत गलत है और उत्तराखंड के लिए यह आत्महत्या करने जैसा है।

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