देहरादून । जंगल का नाम सुनते ही आंखों के सामने घने जंगल व जंगली जानवरों की तस्वीर दौड़ने लगती है। जिससे हर कोई सहम जाता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं। जिनके लिए जंगल ही उनका घर होता है और जंगली जानवरों के बीच ही उन्हें सुकून महसूस होता है। इसका ही एक उदाहरण हैं पवन नेगी।

मूलत: पौड़ी, एकेश्वर ब्लॉक के नौगांव के रहने वाले पवन वर्तमान में दून में हिल्स कॉलोनी में रहते हैं। पवन के पिता स्वर्गीय नरेंद्र मोहन नेगी केवी में शिक्षक थे। उनकी मां प्रेमलता नेगी भी केवी में अध्यापिका रह चुकी हैं। पवन ने पिछले दो साल नेशनल जियोग्राफिक के साथ काउंटिंग टाइगर्स प्रोजेक्ट में काम किया। पवन इस टीम में उत्तराखंड से एक मात्र व्यक्ति शामिल थे।

पवन बतौर कैमरामैन टीम का हिस्सा बने। उनकी टीम ने पिछले दो साल राजा जी नेशनल पार्क की मोतीचूर रेंज, चीला रेंज और रामनगर, जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व की डिकाला रेंज में बाघों की गिनती के साथ उन्हें फिल्माया। वह बताते हैं कि पिछले दो सालों में बहुत कुछ नया सीखने को मिला।

जंगली जानवरों को करीब से देखा और उनके जीवन को समझा। लेकिन पवन का यह सफर आसान नहीं रहा और न ही यह प्रोजक्ट आसानी से उनके हाथ में आया। पवन बताते हैं कि पिछले आठ सालों से लंडन बेस्ड ऑप्टिमम टेलीविजन प्रोडक्शन के साथ जुड़े हैं। पहले के सालों में केवल जंगल को समझने के लिए कहा गया और छोटी डॉक्यूमेंट्री बनाई। अब जाकर दो साल पहले पूरे प्रोजेक्ट में काम करने का मौका मिला।

 

सात अगस्त को दुनिया भर में टेलीकास्ट होगा शो

पवन नेगी बताते हैं कि उनकी पिछले दो सालों की मेहनत सात अगस्त को अंतरराष्ट्रीय चैनल नेशनल जियोग्राफिक पर प्रसारित होगी। पहले चरण में यह दुनिया के 27 देशों में रात आठ बजे प्रसारित होगा। बताया कि इसका दूसरा एपिसोड कुछ महीने बाद रिलीज होगा। पवन ने बताया कि इसके अलावा जल्द दो बड़े प्रोजेक्ट और करने जा रहे हैं।

 

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