अर्थियों पर फूल या फूलों की अर्थियां

0
377

उत्तराखण्ड के नागरिकों ने परिवहन मंत्री के घर तक निकाला शांति मार्च

टिहरी में 9 मासूम बच्चों के सड़क दुर्घटना में खत्म होने व सरकार के कान पर जूं न रेंगने के विरोध स्वरूप आज शाम 5:30 बजे पूर्व निर्धारित संदेश के अनुसार भारी बारिश के बाद भी देहरादून के प्रबुद्ध नागरिक चकराता रोड के यमुना कॉलोनी चौक पर एकत्रित हुवे जहां से परिवहन मंत्री यशपाल आर्य के घर तक जनगीत गाते हुवे केंडल मार्च निकाला।

यमुना कॉलोनी के गेट पर पुलिस ने शांति पूर्वक जा रहे मार्च को रोकने की नाकाम कोशिश की व जाने से रोकने का पूरा प्रयास किया परन्तु मार्च पुलिस को साइड करते हुवे आगे बड़ गया। इसकेे बाद मंत्री रेखा आर्य के घर के बाहर शांति पूर्वक केंडल मार्च में शामिल लोगों ने पुलिस की बात को मानते हुवे आगे न जाकर वहीं पर 2 मिनट का मौन टिहरी में अकाल मृत्यु को प्राप्त हुवे बच्चों के लिए रखा व वहीं पर मोमबत्तियों को लगा कर प्रार्थना की।

मंत्री नहीं आये बाहर-

सत्ता के नशे में चूर परिवहन मंत्री यशपाल आर्य इतने संवेदनशील हो चले हैं कि उन्होंने तेज बारिश में अपने घरों से निकल कर आये लोगों से मिलने की जहमत भी नहीं उठाई।

जनता का क्या था सन्देश –

मैं टिहरी में हुई दुर्घटना का जिम्मेदार खुद को मानता हूँ।

अर्थियों पर फूल या फूलों की अर्थियां

टिहरी की भयंकर सड़क दुर्घटना जिसमें 10 मासूम बच्चों की अकाल मृत्यु हो गयी थी, कुछ बच्चों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है, को हुए 30 घंटे से अधिक हो गए हैं। शासन और प्रशासन के उच्च स्तर पर न कोई दुःखी हुआ है और न ही शर्मसार।

मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री, शिक्षा मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, सड़क मंत्री का जीवन सामान्य गति से चल रहा है। अभी तक किसी ने भी जिम्मेदारी नहीं ली है। तीन-चार अदने से कर्मचारियों को बर्खास्त कर हाथ झाड़ दिए गए हैं।

पिछले साल धूमाकोट में हुई भयंकर बस दुर्घटना, जिसमें 49 लोगों की जान गई थी, के बाद भी कुछ कर्मचारियों को हटाया गया था, पर उससे क्या हुआ

क्या RTO पौड़ी से हटाकर RTO देहरादून बना दिया जाना सजा है

और कोई माने या न मानें, लेकिन मैं टिहरी में हुई दुर्घटना का जिम्मेदार खुद को मानता हूँ।

मैं उत्तराखंड का एक आम नागरिक हूँ, मैं चुप हूँ इसी लिए राज्य में इस स्तर का भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कोताही हो रही है।

मैं चुप हूँ इसलिये अर्थियों पर फूल की जगह फूलों की अर्थियां देखने को अभिशप्त हूँ।

मैं चुप हूँ इसलिये, राज्य में रोज होने वाली दुर्घटनाओं का संज्ञान लेने वाला भी कोई नहीं है।

मैं मानता हूँ कि इन सारी दुर्घटनाओं का कारण मैं ही हूँ, मेरी चुप्पी ने ही इन मासूमों को अकाल मृत्यु दी है, इसलिये मैं कल शाम 5:30 बजे, यमुना कॉलोनी चौक (दून स्कूल के बाहर-चकराता रोड) से, मृतक बच्चों की आत्मा की शांति के लिए शांतिपाठ करता हुआ, परिवहन मंत्री के घर जाऊंगा, परिवहन मंत्री के घर के बाहर भी शांति पाठ करूँगा और मृतक बच्चों की याद में दिया जलाऊंगा।

यदि आप जिंदा हैं, तो आप भी अपनी भूमिका तय कीजिये।

केंडल मार्च में आम नागरिकों के साथ ही कांग्रेस, सपा, वनाधिकार आंदोलन, जनसंवाद, उत्तराखण्ड अगेंस्ट करप्शन, जन क्रांति विकास मोर्चा, एनएसयूआई, आर्यन छात्र संगठन, आदि संगठनों के किशोर उपाध्याय, एस एन सचान, जया शुक्ला, परिणीता बडोनी, रेनु नेगी, शांति रावत, संजय भट्ट, सुशील सैनी, सतीश धौलाखंडी, भार्गव चंदोला, जयदीप सकलानी, प्रेम बहुखंडी, राकेश नेगी, विराट गुप्ता, अरविंद सिंह आर्य, निज़ाक़त अली, सुनील चमोली, आबिद हसन, किशन लाल शर्मा, इस्तियार, अमित चौधरी, अमरजीत सिंह, विकास नेगी, सुरेंद्र रांगढ़, राजेश चमोली, सतीश आर्यन, आदित्य बिष्ट, शिवम, मोहन कुमार काला, विशाल मौर्या, नासिर हुसैन, आज़ाद चौधरी, संजय जैन, विनीत भट्ट बंटू, सुनील भट्ट, याकूब सिद्दीकी, विजय डंगवाल, नेमचंद, महेंद्र चौहान सहित सैकड़ों नागरिक शामिल हुवे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here