आपदा प्रभावितों के चूल्हे अभी भी पटरी पर नहीं

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सुभाष पिमोली

चमोली।बृहस्पतिवार की देर रात्री फटे बादलो के बाद थराली व देवाल ब्लाको में प्रभावित क्षेत्रो में दूसरे दिन भी सामांय जनजीवन पटरी पर नही लौट पाया हैं। क्षेत्र की दस से अधिक सडके जहॉ यातायात के लिए बंद पडी हुई हैं वही आधा पौन दर्जन से अधिक पेयजल योजनाऐ बंद पडी हुई हैं।

आपदा के बाद क्षेत्र की कुछ सडको को लोनिवि थराली ने यातायात के लिए खोल दी हैं। लोनिवि थराली के अधिशासी अभियंता जगदीश सिंह रावत ने बताया की अभी भी थराली-सूनां-पैनगड़,थराली-देवाल-मंदोली-वांण मुख्य मोटर सड़क किमी 17,22,28 सहित कुछ अंय स्थानो पर अवरूद पडी हैं।

इस के अलावा चिडिगा-ग्वालदम,देवाल-कॉडे-सवाड़, थराली-पार्था रैन-पलबरा,मोटर मार्ग बंद पडे हैं। इंहे खोलने के लिए मशीने लगाई गयी हैं। जल्द ही इन सड़को को टम्परेली रूप से यातायात के लिए खोल दिया जायेगा,इस के अलावा पीएमजीएसवाई के तहत देवाल- सुयालकोट-खेता मानमती,थराली-कुराड,नंदकेशरी-जोला,थराली-किमनी आदि मोटर सड़के बंद पडी हैं।

आपदा का व्यापक प्रभाव पेयजल पर भी पडा हैं। थराली के तहत कुराड,ढुगाखोली,ग्वालदम सहित तमाम अंय योजनाओ पर पानी बंद पडा हैं। इस के अलावा देवाल के सबसे आपदा ग्रस्थ फल्दियागांव,उलंग्रा,कांडे,बमणबेरा,हरीपुर प्रखंड मुख्यालय देवाल, तलौर,पदमल्ला सोडिगआदि गांवो मे लाईनो के क्षतिग्रस्थ हो जाने स्रोतो के बह जाने के कारण ग्रामीणो को पानी के लिए दरदर भटकना पड़ रहा हैं।

जल संस्थान थराली केएई एसके राय वअवर अभियंता पंकज सिंह जितलवाण ने बताया कि आपदाग्रस्थ फल्दियागांव के आपदा पीडितो के जैनबिष्ट स्थित राहत कैंप में पानी की व्यवस्था के लिए एक पानी के टैंकर की व्यवस्था की गई हैं। साथ ही देवाल के लिए भी एक टैंकर रखा गया हैं।

क्षेत्र मे तमाम ग्रमीणअंचलो को आने जाने वाले अश्व मार्गो के टूट जाने के कारण घोडे खच्चरो का आना जाना बंद पड़ हैं। जिस से ग्रामीण क्षेत्रो मे आवश्यक वस्तुओ की आपूर्ती बंद पडी हैं। इस के अलावा पैदल रास्तो की स्थिति भी कई गांवो खराब बनी हुई हैं।

गत दिनो दैवी आपदा के कारण कितने मवेशियो की मौते हुई हैं और कितनी व्यक्तिगत व सार्वजनिक परिसंपतियो का नुकसान हुआ हैं। प्रशासन सही सही बताने की स्थिति मे नही आ पाया हैं।
थराली केउपजिलाधिकारी केएस नेगी से नुकसान के बारे में जानना चाहा तो उंहोने बताया कि अभी तहसील प्रशासन सहित तमाम विभाग क्षति के आंकलन मे जुटे हुए हैं।

आपदा से वास्तव मे कितने मवेशीयो की मौते हुई, कितनी संपतियो का नुकसान हुआ पूरी जानकारी मिलने के बाद ही सही तस्वीर सामने आ सकती हैं। बताया की उंहोने सभी उप राजस्वनिरीक्षको को नुकसान का आंकलन करने के अलावा विभागो को अपनी परिसंपतियो के नुकसान का आंकलन कर तहसील को जानकारी देने के निदेश दिये हैं।

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