975 करोड़ से बुझेगी हजारों लोगों की प्यास

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देहरादून। उत्तराखंड के सात जिलों के 35 अर्धनगरीय क्षेत्रों के लिए हजारों लोगों को पेयजल संकट से निजात मिलेगी। 975 करोड़ लागत से उन्नत पेयजल नीति को त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। विश्व बैंक पोषित इस योजना को 2023 तक पूरा करना है। मंत्रिमंडल ने अन्य अहम फैसले में गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के लिए संशोधित ईको सेंसिटिव जोन के प्रस्ताव को स्वीकृत किया। पवित्र धाम गंगोत्री मंदिर को ईको सेंसिटिव जोन के दायरे से बाहर किया गया है।

त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में 21 प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इनमें 19 को स्वीकृति मिली, जबकि दो को स्थगित किया गया। सरकार के प्रवक्ता और काबीना मंत्री मदन कौशिक ने मंत्रिमंडल के फैसलों को ब्रीफ किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़े अर्धनगरीय क्षेत्रों को प्यास से जल्द निजात मिलने जा रही है। इन क्षेत्रों के लिए उत्तराखंड पेयजल कार्यक्रम लागू करने को उन्नत पेयजल नीति बनाई गई है। इस परियोजना में विश्व बैंक का अंश 780 करोड़ और राज्यांश 195 करोड़ है। इस नीति को मंजूरी मिलने से राज्य को 45 करोड़ मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। अर्धनगरीय क्षेत्रों के लिए लंबे समय से पेयजल नीति की जरूरत महसूस की जा रही है। इन क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल और जल की गुणवत्ता चुनौती है। साथ में जल शुल्क नीति, जल मापन नीति व लोक निजी सहभागिता के फॉर्मूले को भी नीति का अंग बनाया जाएगा।

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