आराकोट बंगाण क्षेत्र के गांवों में सड़क करोड़ो के सेब की फसल तबाह

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देहरादून। जनपद उत्तरकाशी केमोरी ब्लाक के आराकोट बंगाण क्षेत्र में सर्दियों में जमकर बर्फबारी के चलते इस साल सेब की रिकार्डतोड़ पैदावार पर आपदा ने पानी फेर दिया है। क्षेत्र में तैयार हुई सेब की फसल को किसान मंडियों तक पहुंचाने की तैयारी कर ही रहे थे कि आपदा में सड़क, पुल, रास्ते तबाह होने से सेब की फसल जहां तहां सड़ने की स्थिति पैदा हो गई है।
हिमाचल प्रदेश से सटे उत्तरकाशी जनपद के आराकोट बंगाण क्षेत्र में ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख आधार सेब की फसल ही है। बीते वर्षों के मुकाबले इस बार क्षेत्र में सेब का उत्पादन करीब दोगुना हुआ, जिससे किसानों को अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी, लेकिन बीते 18 अगस्त को आई आपदा ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। स्थिति यह है कि सेब उत्पादक मोल्डी, टिकोची, किराणू, दुचाणू, बरनाली, डगोली, माकुड़ी, गोकुल, झोटाड़ी, जागटा, चिवां, बलावट, खक्वाड़ी, मोंडा आदि गांवों से आराकोट तक पहुंचने वाली सड़कें, पुल और पैदल रास्ते तक तबाह हो गए हैं। यहां जल्द यातायात सुचारु होने के आसार नहीं लग रहे हैं। तबाह सड़कों के किनारे सेब से भरी पेटियां और क्रेट जमा हैं, जबकि कई बगीचों में अभी पेड़ों पर ही सेब लगे हैं और फलों से लदे पेड़ों समेत सैकड़ों बगीचे तो आपदा में मटियामेट हो गए हैं। बगीचों को पहुंचे नुकसान की भरपाई तो जब होगी तब होगी, लेकिन अभी तो किसानों को सेब की तैयार फसल को मंडियों तक पहुंचाने की चिंता सता रही है। जिला उद्यान अधिकारी प्रभाकर सिंह ने स्वीकारा कि क्षेत्र में करीब पचास हजार पेटी से अधिक सेब तोड़कर सड़क किनारे और बगीचों में पड़ा है। यदि एक हफ्ते के भीतर सड़कें बहाल नहीं हुई तो यह सेब खराब हो जाएगा। इसका बाजार मूल्य चार करोड़ रुपये से अधिक है।
वर्ष 2013 में गंगा भागीरथी की बाढ़ में गंगोत्री हाईवे तबाह होने से करीब तीन माह तक यातायात ठप रहा था। उस समय सरकार ने गढ़वाल मंडल विकास निगम के माध्यम से उपला टकनौर क्षेत्र के गांवों में ही 30 रुपये प्रति किलो की दर से सेब की खरीद की थी। तब उपला टकनौर क्षेत्र से करीब पांच करोड़ रुपये का सेब खरीदा गया था। हालांकि उस समय हुई चूक के कारण अधिकांश सेब हर्षिल क्षेत्र के गोदामों में ही सड़ गया था।

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