अयोघ्या केसः निर्मोही अखाड़ा और सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को झटका, अंतिम फैसला आना बाकी

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नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को 70 साल से कानूनी लड़ाई में उलझे देश के सबसे चर्चित अयोध्या भूमि विवाद मामले में फैसला सुनाया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ ने राजनैतिक, धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील इस मुकदमें की 40 दिन तक मैराथन सुनवाई करने के बाद गत 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। देश के संवेदनशील मामले में फैसले के मद्देनजर देशभर में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस बात के प्रमाण हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरा, सीता रसोई पर हिंदुओं द्वारा पूजा की जाती थी। अभिलेखों में दर्ज साक्ष्य से पता चलता है कि हिंदुओं का विवादित भूमि के बाहरी हिस्‍से पर कब्‍जा था।

10.53 ।ड- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं की आस्था और उनका विश्वास है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। हिंदुओं की आस्था और विश्वास है कि भगवान राम का जन्म गुंबद के नीचे हुआ था। यह व्यक्तिगत विश्वास का विषय है

10.50 – सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्‍य ढांचा इस्लामी संरचना नहीं थी।

10.45 – सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षणसंदेह से परे है। इसके अध्ययन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अदालत ने निर्मोही अखाड़ा के दावे को खारिज किया। निर्मोही अखाड़ा का दावा केवल प्रबंधन का है। निर्मोही अखाड़ा सेवादार नहीं है।

10.42 । कहना है कि विवादित जमीन राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी जमीन थी।

10.39 -गोगोई ने कहा कि बाबरी मस्जिद मीर बाकी द्वारा बनाई गई थी।

10.33 ।ड- सीजेआई गोगोई ने फैसले में कहा कि हम 1946 के फैजाबाद कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिया वक्फ बोर्ड की सिंगल लीव पिटिशन  को खारिज करते हैं।

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