देहरादून। कोरोना की रोकथाम और बचाव के लिए लागू किए लॉकडाउन को दो महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है। इस लॉकडाउन में सबसे ज्यादा मुसीबतों का पहाड़ प्रवासी मजदूरों पर पड़ा था, जिनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। इन हालात में प्रवासियों ने अपने पैतृव गांव उत्तराखंड का रुख किया था। उत्तराखंड में बड़ी संख्या में प्रवासी आ रहे है। लेकिन इनके रखने-खाने की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल खड़े किए है। कांग्रेस का आरोप है कि क्वारंटाइन सेंटर में प्रवासियों के खाने-पीने की उचित व्यवस्था नहीं है।
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने सरकार पर निशान साधते हुए कहा कि सरकार प्रवासियों को थर्मल स्क्रीनिंग कराकर सीधे उन्हें गांव भेज दे रही है। जिससे प्रदेश में कोरोना के मामले बढ़े रहे है। प्रदेश अध्यक्ष सिंह ने सरकार के सुझाव दिया कि उत्तराखंड आने वाले प्रवासियों को पहले बेस कैंप में क्वारंटाइन करना चाहिए, उसके बाद जिला, तहसील और फिर ब्लॉक स्तर पर क्वारंटाइन करवाना चाहिए। लेकिन सरकार ने उनकी थर्मल स्क्रीनिंग करवाकर उन्हें सीधा गांवों की ओर भेज दिया है। साथ ही सरकार ने अन्य राज्य से लौटे लोगों को गांवों में भेजने के बाद उनकी क्वारंटाइन की व्यवस्था ग्राम प्रधानों के कंधों पर डाल दी। प्रीतम सिंह ने कहा कि मुख्य सचिव से ग्राम प्रधानों को दी जाने वाली धनराशि के संबंध में पूछा गया तो पता चला कि ग्राम प्रधानों को क्वारंटाइन की व्यवस्था बनाने के लिए कोई धनराशि नहीं दी गई है। प्रीतम सिंह का कहना है कि उन्होंने खुद फील्ड में जाकर ग्राम प्रधानों से वार्ता की है। जिससे पता चला कि उनके पास लोगों को क्वारंटाइन कराने की कोई व्यवस्था नहीं है।

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