पहाड़ की पगडंडी से सत्ता की सीढ़ी चढे़ हरक को क्या ले डूबेगी साइकिल…..?

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पहाड़ की पगडंडी से सत्ता की सीढ़ी चढे़ हरक को क्या ले डूबेगी साइकिल…..?

 20 साल में कई विवादों में घिरे हरक, अब तक हर बार बच जाते हैं साफ

 रिश्तेदारों-समर्थकों को नौकरी और रोजगार दिलाने में सबसे आगे हैं हरक

कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत हमेशा विवादों में रहते हैं, इसके बावजूद उनके प्रति आम जनता में साफ्ट कार्नर होता है। उनके नाम पर सब हंस कर टाल देते हैं। कारण, हरक भले ही विवादों में हों, लेकिन वो अपने समर्थकों और रिश्तेदारों को रोजगार दिलाने में सबसे आगे होते हैं। हरक जबरदस्त जुगाडू हैं। पहाड़ की पगडंडी से चलकर सत्ता की सीढ़ी चढे हरक को राजनीति के सभी गुर आते हैं। आज जब उन्हें सरकार ने उत्तराखंड भवन और सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है और उन्हें इसकी भनक भी नहीं लगी तो एक बार फिर उनके लिए राजनीतिक चुनौती बढ़ी है। देखे इससे कैसे निपटते हैं।

मौजूदा मामला श्रम विभाग की साइकिल बांटने का है। यदि किसी ने ध्यान दिया होता तो पता चलता कि कोरोना काल में श्रम विभाग की राशन किटों में भी धांधली होने की बात आई थी, लेकिन तब लाॅकडाउन की स्थिति थी, तो मामला उजागर ही नहीं हुआ। ये बात भी सही है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा खरीदी गई साइकिलें गोदाम वैसे ही जंग खा़ रही थी, लेकिन आम आदमी पार्टी की टोपी लगाकर साइकिल बांटना ही सबसे बड़ी समस्या हो गया। क्योंकि भाजपा ने मान लिया है कि कांग्रेस अब प्रदेश में दम तोड़ चुकी है। ऐसे में आम आदमी पार्टी की धमक से भाजपा डरी हुई है। भाजपा का टारगेट आप है। हरक के एक निकटस्थ कथित रिश्तेदार ने आप ज्वाइन की है, और कहा जा रहा है कि आप की टोपी पहन कर लोगों को बेहिसाब साइकिलें बांट दी। यहां तक 80 साल की महिला को साइकिल दे दी गई। भला भाजपा यह कैसे सह सकती है?

दूसरी बात, हरक अपने राजनीतिक जीवन में दल-बदल करते रहे हैं। आज वो भाजपा में हैं, लेकिन भाजपा और आरएसएस कैडर मानता है कि उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। वो सत्ता के लिए कहीं भी छलांग लगा सकते हैं। अकेले हरक की नहीं बल्कि कांग्रेस से भाजपा में आए अधिकांश नेताओं की विश्वसनीयता को लेकर आज भी पार्टी कैडर सवाल उठाती है। यही कारण है कि सुबोध उनियाल को छोड़कर कोई भी नेता त्रिवेंद्र के इर्द-गिर्द अपनी जगह नहीं बना सका है।

हरक का विवादों से पुराना नाता है। इसके बावजूद वो साफ बच निकलते हैं। उनके रिश्तेदारों और समर्थकों की लंबी लिस्ट है जिनके लिए उन्होंने दिल खोलकर सहयोग किया है। संभवतः साइकिल प्रकरण को भी इससे ही जोड़कर देखा जा रहा हो। हरक को बोर्ड अध्यक्ष पद से हटाने के बारे में सरकार ने भनक भी नहीं लगने दी है। बतौर हरक उन्हें मीडिया से इस संबंध में जानकारी मिली है। इस बीच सरकार ने हरक के सभी नजदीकियों को हटाकर नया बोर्ड भी बना दिया है। देखें अब क्या होता है?