सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर लोगों को परेशान करना गलत- सुप्रीम कोर्ट

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सरकारों की आलोचना करने और कथित रूप से राजनीतिक तंत्र को बदनाम करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट्स (Social Media Post) के लिए दूर-दराज के लोगों को पुलिस की ओर से समन भेजने के चलन पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने चिंता जाहिर की है. सरकारी व्यवस्था की आलोचना वाले सोशल मीडिया पोस्ट के लिए लोगों को परेशान करने पर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है.

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकारों को एक जोरदार संदेश भेजा है. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘सरकारी तंत्र की आलोचना और उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट्स डालने पर हम नागरिकों को देश के एक कोने से दूसरे कोने नहीं भेज सकते हैं’. SC ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा, ‘ऐसी पोस्ट को आधार बनाकर नागरिकों को एक कोने से दूसरे कोने घसीटने की हरकत बंद करें. हम बोलने की स्वतंत्रता (Freedom Of Speech) पर रोक नहीं लगने देंगे’.

दरअसल, दिल्ली की एक निवासी रोशनी बिसवास ने लॉकडाउन के मानदंडों को लागू नहीं करने को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना की थी, जिसके बाद बंगाल पुलिस ने दिल्ली निवासी को समन जारी करते हुए कड़ी चेतावनी दी थी. इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है.

‘सीमा पार न करे पुलिस’

संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (A) के तहत नागरिकों को दी जाने वाली बोलने की आज़ादी के अधिकार का हवाला देते हुए और हर कीमत पर इस अधिकार को बचाए रखने की कसम खाते हुए जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा, ‘सीमा को पार न करें. भारत को एक स्वतंत्र देश बने रहने दीजिए. हम, सर्वोच्च न्यायालय के रूप में, बोलने की आज़ादी की रक्षा के लिए यहां हैं. नागरिकों को राज्य सरकार परेशान न करे इसी को सुनिश्चित करने के लिए संविधान ने सुप्रीम कोर्ट बनाया है.

पीठ ने कहा, ‘पुलिस द्वारा दिल्ली निवासी रोशनी बिसवास को सरकार की आलोचना वाले सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए समन भेजना बोलने के अधिकार के साथ छल है. किसी भी नागरिक पर सिर्फ ये कहने के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है कि सरकार कोरोना महामारी से निपट पाने में असफल सिद्ध हो रही है’. उन्होंने कहा, ‘उन्हें (रोशनी बिसवास) अभिव्यक्ति से रोकने के लिए समन भेजनकर पुलिस एक खतरनाक मिसाल कायम कर रही है’. वकील महेश जेठमलानी ने कहा, ‘बंगाल पुलिस का इरादा महिला को सामने बुलाकर उसे डराने-धमकाने का था’.

न्याय पीठ ने कहा, “कल को कोलकाता, चेन्नई, मुंबई और मणिपुर की पुलिस भी यही करेगी और देश के सभी राज्यों के लोगों को कड़ा चेतावनी देते हुए समन भेजने लगेगी.