पर्यटन सीजन के दौरान जाम से निपटने का प्लान तैयार

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देहरादून। पहाड़ी राज्य उत्तराखण्ड में इन दिनों पर्यटन सीजन पिक पर है। प्रदेश की राजधानी देहरादून में देश के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में शुमार है। गर्मियों के कारण बाहरी राज्यों के पर्यटक भारी संख्या में दून के पर्यटक स्थल पहुंच रहे हैं। ऐसे में लोगों को शहर को जाम की समस्या से जुझना पड़ रहा है। सहारनपुर चैक से प्रिंस चैक के बीच पूरे दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। सहारनपुर चैक के पास आढ़त बाजार में दिनभर माल ढुलाई के चलते जाम लगा रहता है। ऐसे में जिला पुलिस ने सहारनपुर चैक पर जाम से निजात दिलाने के लिए आढ़त बाजार व्यापार मंडल को माल ढुलाई को लेकर दिशा निर्देश दिए। साथ ही नियमों का पालन नहीं होने पर चालान करने कि चेतावनी दी। यहां गौर करने वाली बात है कि आढ़त बाजार में सुबह 10 बजे से शाम तक ट्रकों से दुकानों का सामान सड़कों पर ही उतारा जाता है। वहीं पर्यटन सीजन भी इन दिनों पिक पर है। जिसके चलते सहारनपुर चैक के पास जाम की स्थिति बनी रहती है। जिससे पर्यटक और शहर वासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जाम से निजात दिलाने के लिए एसपी ट्रैफिक और सीओ सिटी ने आढ़त बाजार में समान लोडिंग-अनलोडिंग पर सहमति को लेकर व्यापार मंडल के साथ तालमेल बैठाकर लोडिंग-अनलोडिंग की समयावधि कम करने का निर्णय लिया। गया.सीओ सिटी शेखर सियाल ने बताया कि सहारनपुर चैक से लेकर प्रिंस चैक तक आढ़त बाजार के कारण ही जाम लगता है। जिसके चलते आढ़त बाजार व्यापार मंडल के साथ बैठक के दौरान लोडिंग-अनलोडिंग की समय अवधि को कम करने का फैसला लिया गया है। साथ ही जल्द ही आढ़त बाजार व्यापार मंडल निर्देशों का पालन करेगा। निर्देशों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ चालान की कार्रवाई की जाएगी।

एमडीडीए को देहरादून व मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी का ही पता नहीं
पर्यटन सीजन में सारे दावों की निकली हवा
देहरादून। त्रिवेंद्र रावत सरकार ने 13 जिलों में 13 नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने का अभियान भी शुरू किया है। लेकिन इस साल इतने ज्यादा पर्यटक आ गए हैं कि सारी व्यवस्थाएं ढह गई नजर आ रही हैं। खुद प्रदेश के पर्यटन मंत्री यह स्वीकार कर रहे हैं कि प्रदेश के टूरिस्ट डेशटिनेशन अपनी क्षमता से अधिक पर्यटकों से जूझ रहे हैं। लेकिन समस्या यह है कि मसूरी जैसे पर्यटक स्थल कितनी संख्या में लोगों का भार उठा सकता है। यही अभी पता नहीं है। प्रदेश के टूरिस्ट डेस्टीनेशन अपनी क्षमता से ज्यादा प्र्यटकों को ढो रहे हैं और यही वजह है कि राज्य भर से लोगों के लंबे ट्रैफिक जामों में फंसने की खबरें आ रही हैं। खासकर वीकेंड पर नैनीताल, मसूरी जैसे मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर इतनी ज्यादा संख्या में लोग पहुंच रहे हैं कि सारे इंतजाम धरे के धरे रह जा रहे हैं। .एक अनुमान के अनुसार 1.10 करोड़ की आबादी वाले उत्तराखंड में हर साल 50 लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं। यानि कुल आबादी के आधे तो पर्यटक ही आते हैं। इतनी बड़ी फ्लोटिंग पॉपुलेशन के लिए इंन्फ्रस्ट्रक्चर प्रदेश के पास है ही नहीं। पर्यटन के लिहाज से मई और जून राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इन दो महीनों में धार्मिक पर्यटन और घूमने के लिए पहुंचते हैं। मशहूर हिल स्टेशनों पर तो वीकेंड्स में जगह मिलनी मुश्किल हो जाती है। मौजूदा व्यवस्थाएं इतनी बड़ी फ्लोटिंग पॉपुलेशन के लिए नाकाफी साबित होती हैं। देहरादून-मसूरी के लिए सिटी प्लानिंग का काम कर एमडीडीए यानि मसूरी देहरादून डेवलपमेंट अथॉरिटी करती है। एमडीडीए के उपाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि देहरादून और मसूरी के विकास के लिए मास्टर प्लान बनाया जा रहा है। इसमें अगले 20 साल तक की जरूरतों का ख्याल रखा जाएगा। लेकिन कमाल की बात यह है कि अभी एमडीडीए तक को नहीं पता कि देहरादून-मसूरी कि कैरिंग कैपेसिटी है कितनी। श्रीवास्तव कहते हैं कि मास्टर प्लान में इसका भी अध्ययन किया जा रहा है। राज्य बनने के बाद से उत्तराखंड टूरिज्म के आधार पर विकास के सपने तो देखता-बुनता रहा लेकिन अपने पर्यटक स्थलों की सेहत की सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए कुछ नहीं किया। अब जबकि बड़ी संख्या में पर्यटक आने लगे हैं तो व्यवस्थाओं के सारे दावे हवा हो जा रहे हैं।

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