यहाँ आने से निसंतान दंपति को मिलता है संतान का सुख

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यहाँ आने से निसंतान दंपति को मिलता है संतान का सुख

मधुगंगा तट पर है सिद्धपीठ मधुगंगेश्वर महादेव

चंद्र प्रकाश बुडाकोटी
देहारादून-भारत भूमि महान है तीर्थ इसके प्राण है भारत बिशाल धरा पर केवल भौगोलिक दृष्टि से एक भू खंड ही नहीं अपितु ग्रन्थ परम्परा ,संतप्रम्परा तीर्थ परंपरा ,के साथ समूचे बिश्व में जगत गुरु ,का सम्मान पाया है।बिश्व बंधुत्व बसुधैव कुटुम्बकम की प्रेरणा।इन सभी भावनाओ,प्रेरणाओं के उदगम है तीर्थ। तीर्थो का जहा आध्यात्मिक गौरव रहा है वही नौ नाथ चौरासी सिद्ध पीठो वाली भारत भूमि ने सदियो-सदियो से भारतीय सस्कृति के सजक प्रहरी बनकर सनातन धर्म, बैदिक धर्म की पताका को ऊँचा किए हुए है। हिम के हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड देवादि देव की तपस्थली के नाम से सर्वत्र बिख्यात है देव भूमि में मठ मंदिरो की बहुतायत यहाँ आने वाले आस्थावान श्रद्धालुओ को अपनी महता का अहसास कराती है।पौड़ी जनपद के लैंसडौन कौड़िया पट्टी में मधुगंगा के तट पर स्थित मधुगंगेश्वर महादेव भगुलि नावँ। मान्यता है की निसंतान दंपति को यहाँ आने से संतान का सुख मिलता है। संतान प्राप्ति के लिए भक्त इस शिव धाम में शिवाअर्चन पार्थिक करते है और उन्हे अशीर्बाद स्वरूप संतान सुख कि प्राप्ति होती है।भोलेनाथ के भक्त शीला निवासी रामसिंह रावत कहते है की वे संतान सुख से सालो से बंचित थे उन्होने इस सिद्ध पीठ मे पार्थिक पाठ किया भोले की कृपा से पुत्र की प्राप्ति हुई।वही पंडित अनूप बुडाकोटी बताते है की उन्होंने जितने भी संतान सुख से बंचित लोगो के लिए यहाँ पर शिबार्चन किया वे आज संतान सुख पा चुके है। मधुगंगा के तट पर स्थित इस भोलेनाथ के शिवालय सिद्द पीठ में साल भर आस्थावान भक्तो का आना जाना लगा रहता है, देश बिदेश से महादेव के भक्त भोलेनाथ से मनोती मांगने आते है बाबा सभी की मनोकामना पूरी करते है।
आस्था एवम पर्यटन की दृस्टि से मनोहारी क्षेत्र होने के कारण सैकड़ो की तादात में भगुलि नाव में बाबा के दर्शनों को देश बिदेश व स्थानीय श्रद्धालुओ का आवागमन वर्ष भर बना रहता है।

सावन मे होता है अखंड पूजा पाठ
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यहाँ पर सावन महीने में अखंड पाठ पूजा ,भी भक्त करते है।बाबा को सिरफल ,फल ,फूल ,बेल पत्र ,दूध ,प्रसाद चढ़ाया जाता है।बाबा भगुलि नाव मधु गंगेस्वर महादेव भक्तो की हर मुराद पूरी करते है।आस्था एवम रमणीक भगुलि नाव मधु गंगा एक स्थान ही नहीं यहाँ आने वाले निसंतान दंपति को संतान सुख भी देते है।

कैसे पहुचे
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कोटद्वार से दुगड्डा ,डेरियाखाल होते हुए चुंडाई सड़क मार्ग तक। यहाँ से ,पैदल एक किलोमीटर।
लैंसडाउन पर्यटन क्षेत्र से 15 किलोमीटर दूर।

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