बहुनि सन्ति तीर्थानि दिविभूमौ रसासु च* *बदरी सदृशं तीर्थ न भूतो न भविष्यति*

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🌹🙏 *जय जय श्री बद्रीविशाल* 🙏🌹

*बहुनि सन्ति तीर्थानि दिविभूमौ रसासु च*
*बदरी सदृशं तीर्थ न भूतो न भविष्यति*

 

*भू-वैकुण्ठ-कृतं वासं देवदेवं जगत्पतिम्*
*चतुर्वर्ग-प्रदातारं श्रीबदरीशं नमाम्यहम्*
*तापत्रय-हरं साक्षात् शान्ति-पुष्टि-बल-प्रदम्*
*परमानन्द-दातारं श्रीबदरीशं नमाम्यहम्*

इस धरती पर हर दिशा और हर स्थान में बहुत से तीर्थ हैं लेकिन उत्तराखंड के हिमालय में इस धरा के स्वर्ग कहे जाने वाले वैकुण्ठ श्री बदरीनाथ जैसा तीर्थ न तो पहले कभी था और न भविष्य में कभी होगा, जिसमें भगवान की पूजा छ: मास *मनुष्य* करते हैं और शीतकाल में छ: मास भगवान की पूजा *देव* करते हैं।

*ऐसे वैकुण्ठाधिपति भगवान श्री बदरीनाथ जी के कपाट आज दिनाँक 20 नवम्बर 2021 को सांयकाल 6-45 बजे से शीतकाल के लिये बन्द हो रहे हैं।*

हम आप सभी की ओर से भगवान के श्रीचरणों में साष्टांग वन्दन करते हुये कामना एवं प्रार्थना करते हैं कि हे भगवान! आपके द्वारा सृजित इस सृष्टि के सभी जीवों पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखना।

*आपकी कृपा से सृष्टि के सभी जीव सदैव सुखी, स्वस्थ, समृद्ध एवं निरोगी हों और सभी का मंगल हो।*

समस्त जगत में आपसी प्रेम, भाईचारा व आपके श्रीचरणों के प्रति सदैव प्रीति बनी रहे।
*ई०/पं०सुन्दर लाल उनियाल*
*नैतिक शिक्षा व आध्यात्मिक प्रेरक*
*दिल्ली/इन्दिरापुरम,गा०बाद/देहरादून*
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