भारतीय लोकतंत्र के मंदिर में आतंकी हमले हेतु अपना सर्वोच्च बलिदान
डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
बीस साल पहले, भारत की सर्वोच्च विधायी संस्था संसद में एक नृशंस आतंकी हमला हुआ था, जिसने देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया था. 13 दिसंबर 2001 को हुए उस हमले का खौफ देश की जनता के जेहन में आज भी ताजा है.भारत में संसद पर हमले के आज 20 साल हो गए हैं. आज ही के दिन आतंकवादियों ने गोलियां से हमला करके पूरी दुनिया को दहला दिया था, जिसमें संसद और सांसदों की सुरक्षा में तैनात कई सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे. सबसे बड़ी बात यह है कि जिस समय संसद पर आतंकियों ने हमला किया था, उस समय भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी और प्रमोद महाजन अंदर ही मौजूद थे. तभी आतंकियों ने तड़ातड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी थी.आज ही के दिन साल 2001 में 13 अगस्त की सुबह आतंक का काला साया देश के लोकतंत्र की दहलीज तक आ पहुंचा था. देश की राजधानी के बेहद महफूज माने जाने वाले इलाके में शान से खड़ी संसद भवन की इमारत में घुसने के लिए आतंकवादियों ने सफेद रंग की अंबेसडर का इस्तेमाल करके सुरक्षाकर्मियों की आंखों में धूल झोंकने का काम किया था, लेकिन उनके कदम लोकतंत्र के मंदिर को अपवित्र कर पाते उससे पहले ही सुरक्षा बलों ने उन्हें ढेर कर दिया.संसद पर हमले की बरसी के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शहीद सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मैं उन बहादुर सुरक्षा कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने 2001 में आज ही के दिन आतंकवादी हमले के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसद की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए राष्ट्र सदैव उनका आभारी रहेगा. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मैं उन सभी सुरक्षा कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जो 2001 में संसद में हुए हमले में अपने कर्तव्य के दौरान शहीद हुए थे. राष्ट्र के लिए उनकी सेवा और सर्वोच्च बलिदान हर नागरिक को प्रेरित करता है.तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस आतंकी हमले की तुलना अमेरिका पर हुए 9/11 हमले से की थी. संसद हमले से सिर्फ 3 महीने पहले ही अमेरिका में 9 सितंबर को सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ था. 13 दिसंबर को सामान्य दिनों की तरह ही संसद की कार्यवाही चल रही थी. उस दिन विपक्ष के हंगामे की वजह से संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी. करीब 40 मिनट बाद 11 बजकर 20 मिनट पर आतंकवादी संसद परिसर में दाखिल हुए थे. दोनों सदन के स्थगित होने की वजह से तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और सोनिया गांधी समेत कई नेता बाहर निकल चुके थे. लेकिन तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत 100 सांसद संसद भवन में मौजूद थे. तारीख थी 13 दिसंबर 2001। ठंड का मौसम था और बाहर धूप खिली हुई थी। संसद में विंटर सेशन चल रहा था और “महिला आरक्षण बिल” पर हंगामा जारी था। इस दिन भी इस बिल पर चर्चा होनी थी, लेकिन 11:02 बजे संसद को स्थगित कर दिया गया।इसके बाद उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष की नेता सोनिया गांधी संसद से जा चुके थे। तब के उपराष्ट्रपति कृष्णकांत का काफिला भी निकलने ही वाला था। संसद स्थगित होने के बाद गेट नंबर 12 पर सफेद गाड़ियों का तांता लग गया।इस वक्त तक सब कुछ अच्छा था, लेकिन चंद मिनटों में संसद पर जो हुआ, उसके बारे में न कभी किसी ने सोचा था और न ही कल्पना की थी। करीब साढ़े ग्यारह बजे उपराष्ट्रपति के सिक्योरिटी गार्ड उनके बाहर आने का इंतजार कर रहे थे और तभी सफेद एंबेसडर में सवार 5 आतंकी गेट नंबर-12 से संसद के अंदर घुस गए। उस समय सिक्योरिटी गार्ड निहत्थे हुआ करते थे।पहले आतंकियों की मुठभेड़ दिल्ली पुलिस के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर जीतनराम से हुई थी. वह उप राष्ट्रपति के काफिले में तैनात थे. इसके बाद आतंकी जीतराम से मुठभेड़ के बाद आंतकियों ने कार संसद भवन के गेट नंबर 9 की तरफ मोड़ दी थी. इस गेट का इस्तेमाल प्रधानमंत्री राज्यसभा में जाने के लिए करते हैं. कार थोड़ी दूर आगे बढ़ी लेकिन ड्राइवर सीट पर बैठे आतंकी उस पर कंट्रोल नहीं रख पाया और वो सड़क किनारे लगे पत्थरों से टकराकर रुक गई. पांचों आतंकी कार से निकलकर कार के बाहर तार बिछाना और उससे विस्फोटकों को जोड़ना शुरू कर दिया. तब तक जीतराम उनतक पहुंच चुके थे. उन्होंने अपनी रिवॉल्वर अपने हाथ में ले रखी थी. एक आतंकी को निशाने पर लेकर जीतराम ने फायर कर दिया. गोली आतंकी के पैर में लगी. आतंकी ने भी जीतराम पर फायर झोंक दिया. आतंकी कार में ब्लास्ट करना चाहते थे. लेकिन वो ऐसा करने में नाकाम रहे. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों से करीब 30 मिनट तक चली मुठभेड़ में आतंकियों को मार गिराया गया था. देश पर हुए इस आतंकी हमले के मंसूबों को नाकाम करने में जेपी यादव, मतबर सिंह, कमलेश कुमारी, नानक चंद, रामपाल, ओमप्रकाश, घनश्याम, बिजेन्दर सिंह, देशराज जैसे वीर लड़ते हुए शहीद हो गए। इस आतंकी हमले में न्यूज एजेंसी एएनआई के कैमरामैन विक्रम सिंह बिष्ट की भी मौत हो गई थी।इस पूरे हमले में 5 पुलिसवाले,एक संसद का सुरक्षागार्ड और एक माली की मौत हो गई. करीब 22 लोग जख्मी हुए. आतंकियों के साथ सुरक्षाकर्मियों की मुठभेड़ करीब एक घंटे तक चली थी.जो 2001 में संसद हमले के दौरान अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए शहीद हो गए थे. राष्ट्र के लिए उनकी सेवा तथा सर्वोच्च बलिदान हर नागरिक को प्रेरित करता है.’ आतंकवादी हमले के दौरान संसद की सुरक्षा करते हुए हमारे वीर सुरक्षा कर्मियों द्वारा दिये गए सर्वोच्च बलिदान के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करती है तथा उनके परिजनों के प्रति हार्दिक संवेदना एवं एकजुटता व्यक्त करती है।











