पौने चार करोड़ कांवड़िए, सैंपलिंग हुई मात्र 1907

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पौने चार करोड़ कांवड़िए, सैंपलिंग हुई मात्र 1907

 डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला

दो साल बाद शुरू हुए मेले में तीन करोड़ 79 लाख 70 हजार कांवड़ियों ने हरिद्वार पहुंचकर गंगा स्नान किया और वे कांवड़ जल भरकर अपने गंतव्यों को रवाना हुए। कांवड़ मेला तो सकुशल संपन्न हो गया, लेकिन धर्मनगरी में कोरोना प्रसार का खतरा एक बार फिर डराने लगा है। इसकी वजह कांवड़ मेले में उमड़ी तीन करोड़ 79 लाख 70 हजार लोगों की भीड़ है। कांवड़ मेले में कुंभ की तरह कई राज्यों से पहुंचे लोग गंगा स्नान कर वापस लौटे हैं। इस अवधि में उत्तराखंड ही नहीं, देशभर में कोरोना के नए मामले भी तेजी से बढ़े हैं लेकिन हरिद्वार में सैंपलिंग बंद रही है। कांवड़ अवधि के 13 दिनों में मात्र 1907 कोरोना आशंकितों के सैंपल लिए गए। वायरल फीवर और डायरिया के बढ़ते मामलों ने कोरोना संक्रमण के खतरे को और अधिक प्रबल बना दिया है।14 जुलाई से कांवड़ मेला शुरू हुआ। 26 जुलाई को मेले का समापन हो गया। हरिद्वार में पूरे साल श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। औसतन प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख लोग वाया हरिद्वार होकर आवाजाही करते हैं। हरिद्वार पहुंचने पर गंगा स्नान भी करते हैं। पर्व स्नानों पर संख्या बढ़कर सात से 10 लाख तक पहुंच जाती है लेकिन इस बार कांवड़ मेले में एतिहासिक भीड़ उमड़ी। दो साल बाद शुरू हुए मेले में तीन करोड़ 79 लाख 70 हजार कांवड़ियों ने हरिद्वार पहुंचकर गंगा स्नान किया और वे कांवड़ जल भरकर अपने गंतव्यों को रवाना हुए। कांवड़ियों की संख्या का दावा पुलिस ने किया है। जुलाई पहले सप्ताह से देशभर में कोविड के नए मामलों में तेजी आने लगी। इसकी बड़ी वजह मौसमी बदलाव से वायरल फीवर और डायरिया की चपेट में आने से इम्युनिटी सिस्टम का कमजोर होना रहा है। कमजोर इम्युनिटी होने से बच्चों से लेकर बड़े आसानी से कोरोना की चपेट में आने लगे। उत्तराखंड में भी कोरोना के मामलों में तेजी देखी गई है। प्रदेश सरकार को महीनों बाद 25 जुलाई को कोविड से बचाव के लिए एसओजी जारी करनी पड़ी है। मेला अवधि में हरिद्वार में कोविड आशंकितों की जांचें गिनती की हुईं। पुलिस-प्रशासन के अलावा स्वास्थ्य महकमा कांवड़ मेला ड्यूटी में लगा रहा। कांवड़ रूट पर अस्थायी अस्पतालों में बीमार कांवड़ियों का प्राथमिक उपचार हुआ। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो 13 जुलाई तक जिले में कोविड जांचों की कुल संख्या 2624745 थी। 26 जुलाई को यह संख्या 2626652 पहुंची। यानी 13 दिनों में मात्र 1907 सैंपल हुए। औसतन प्रतिदिन 146 लोगों का सैंपल हुआ, जबकि कांवड़ से पूर्व सामान्य दिनों में हरिद्वार में 130 से 150 सैंपल रोजाना होते थे। कांवड़ शुरू होने से पहले हरिद्वार में एक्टिव केस सात थे, जो मेले के समापन पर 11 हैं। सैंपलिंग नहीं होने से नए मरीज नहीं मिल सके हैं। हरिद्वार में अधिकतर परिवारों में लोग सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और पेट खराब होने की समस्या से पीड़ित हैं। सामान्य वायरल के अलावा कोरोना के भी अधिकतर ऐसे ही लक्षण होते हैं। ऐसे में लोग परेशान हो रहे हैं लेकिन अस्पतालों में कोविड जांच की सुविधा बेहद सीमित है। स्थानीय लोगों में दहशत भी बनी है। कुंभ में स्थानीय लोग कोरोना का कहर झेल चुके हैं। लोग चाहकर भी अपनी कोविड जांच नहीं करवा पा रहे हैं। सरकार की नई एसओपी के बाद अब 28 जुलाई से सभी सरकारी अस्पतालों में कोविड टेस्टिंग करने और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। मेला अस्पताल में जो भी मरीज कोविड टेस्ट करवाने स्वयं आ रहा था, उसकी जांच की जा रही है। कांवड़ मेले के दौरान अलग से कोई कोविड जांच की डेस्क नहीं बनाई गई थी। चिकित्सा स्टाफ कांवड़ मेला ड्यूटी पर था। वरिष्ठ सर्जन जिला अस्पताल इस संबंध में मेला अवधि में अस्पताल में कोई भी कोविड टेस्ट नहीं किया गया है। 28 जुलाई से चिकित्सक से परामर्श के बाद मरीज कोविड टेस्ट करा पाएंगे। चार धाम यात्रा की तर्ज पर पुलिस विभाग की ओर से कांवड़ यात्रा के लिए भी रजिस्ट्रेशन पोर्टल शुरू तो कर दिया है, लेकिन संसाधनों के अभाव के चलते इसे गंभीरता नहीं लिया गया है। इसके अलावा कांवड़ यात्रा में टोलियों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, ऐसे में सबका रजिस्ट्रेशन चेक करना मुश्किल था।है कांवड़ यात्रा मंगलवार को श्रद्धालुओं की संख्या का नया रिकॉर्ड बनाकर संपन्न हुई। । गंगाजल लेने के लिए ऐसी भीड़ उमड़ी की तमाम व्यवस्थाएं कम पड़ गई।.

लेखक के निजी विचार हैं वर्तमान में दून विश्वविद्यालय कार्यरतहैं