भगवान की भक्ति सच्ची भक्ति व्यास आचार्य दिवाकर बडोला

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भगवान की भक्ति सच्ची भक्ति व्यास आचार्य दिवाकर बडोला
कोटद्वार। कोटद्वार के मोटाढ़ाक में श्रीमद भागवत कथा का छठा दिवस हैं जिसमें व्यास जी आचार्य दिवाकर बडोला जी पूजा कर्मकाण्ड में आचार्य बृजेश बडोला जी, आचार्य दीपक घिल्डियाल जी, भागवात मूल पाठ में आचार्य रमेश ग्वाडी जी, संगीतज्ञ संदीप डोभाल जी ओर अभिषेक कोठारी जी अपने यजमान रमेश चन्द्र कोठारी ओर उनके सुपुत्र दिनेश चन्द्र कोठारी, गणेश कोठारी, राकेश कोठारी ओर सभी कोठारी पारिवार सहित श्री रमेश चन्द्र कोठारी जी अपनी पत्नी स्व0 सत्यभामा कोठारी की वार्षिक तिथि में अपने निवास स्थान में अमृतमयि कथा वर्तमान में चल रही हैं आज छठा दिवस हैं।जिसमें छठे दिन कृष्ण जन्म हुआ और प्रहलाद। जी का चरित्र हुआ के बारे मैं विस्तार से जानकारी दी।
श्रीमद्भागवत भारतीय वाङ्मय का मुकुटमणि हैभगवान शुकदेव द्वारा महाराज परीक्षित को सुनाया गया भक्तिमार्ग तो मानो सोपान ही है। इसके प्रत्येक श्लोक में श्रीकृष्ण-प्रेम की सुगन्धि है। इसमें साधन-ज्ञान, सिद्धज्ञान, साधन-भक्ति, सिद्धा-भक्ति, मर्यादा-मार्ग, अनुग्रह-मार्ग, द्वैत, अद्वैत समन्वय के साथ प्रेरणादायी विविध उपाख्यानों का अद्भुत संग्रह है।छटवे दिवस में व्यास जी ने कृष्णा जन्म एवं प्रहलाद जी का चरित्र के बारे में भागवताचार्य दिवाकर बड़ोला जी बताते हैं कि भागवत में 18 हजार श्लोक, 335 अध्याय तथा 12 स्कन्ध हैं। इसके विभिन्न स्कंधों में  विष्णु  के  लीलावतारों का वर्णन बड़ी सुकुमार भाषा में किया गया है। परंतु भगवान कृष्ण की ललित लीलाओं का विशद विवरण प्रस्तुत करने वाला दशम स्कंध भागवत का हृदय है।  श्रीमद्भागवत भक्तिरस तथा अध्यात्मज्ञान का समन्वय उपस्थित करता है। भागवत निगमकल्पतरु का स्वयं फल माना जाता है जिसे नैष्ठिक ब्रह्मचारी तथा ब्रह्मज्ञानी महर्षि शुक ने अपनी मधुर वाणी से संयुक्त कर अमृतमय बना डाला है। श्रीमद्भाग्वतम् सर्व वेदान्त का सार है। उस रसामृत के पान से जो तृप्त हो गया है, उसे किसी अन्य जगह पर कोई रति नहीं हो सकती। अर्थात उसे किसी अन्य वस्तु में आनन्द नहीं आ सकता। जय हो श्रीमदभागवत की जय हो।।

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