-खुमाड़ में हजारों लोगों ने अमर शहीदों को किया नमन, -अलग-अलग मंचों से दिखी सियासी तस्वीर
सल्ट। आजादी के संग्राम में देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सल्ट के अमर शहीदों की बरसी पर शनिवार को खुमाड़ की धरती श्रद्धा से भर उठी। शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए सुबह से ही शहीद स्मारक पर लोगों का तांता लगना शुरू हो गया। विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ हजारों की संख्या में स्थानीय लोगों ने शहीद स्मारक पहुंचकर अमर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
शनिवार सुबह खुमाड़ स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ जुटने लगी। केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, सल्ट विधायक महेश जीना, रानीखेत विधायक प्रमोद नैनवाल, कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, कांग्रेस नेत्री एवं ब्लॉक प्रमुख कंचन रावत, गंगा पंचोली, विक्रम रावत, शोबन सिंह बोरा, अमित रावत, दीप्ति भारद्वाज, नारायण सिंह, यूकेडी के प्रताप बसनाल सहित विभिन्न दलों के नेताओं और उनके समर्थकों ने स्मारक पहुंचकर शहीदों को नमन किया। हजारों स्थानीय लोगों ने भी पुष्प अर्पित कर शहीदों के बलिदान को याद किया।
केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में सल्ट के शहीदों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों के सामने शहीदों ने घुटने नहीं टेके और देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
सल्ट विधायक महेश जीना ने शहीदों के बलिदान को अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने शहीदों के सपनों को साकार करने और उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लेने का आह्वान किया। अन्य वक्ताओं ने भी शहीदों के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्रद्धांजलि के बीच अलग-अलग सियासी मंच
शहीद दिवस पर जहां खुमाड़ में शहीदों को नमन करने के लिए हजारों लोग जुटे, वहीं राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों में सियासी रंग भी नजर आया। भाजपाइयों ने खुमाड़ के एक मैदान में अलग मंच सजाया, जबकि कांग्रेसियों ने पोखरी में अपना मंच तैयार किया। दोनों दलों ने अपने-अपने कार्यक्रमों के जरिए शहीद दिवस पर जुटी भीड़ को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।
हालांकि मंच अलग-अलग रहे, लेकिन शहीदों को श्रद्धांजलि देने का भाव एक रहा। खुमाड़ की धरती पर दिनभर अमर शहीदों की शहादत को याद किया जाता रहा और उनके बलिदान को नमन करने के लिए लोगों की आवाजाही बनी रही।
















